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मानव विकास की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ (Growth And Development)। हम सà¤à¥€ जानते हैं कि मानव का विकास निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ अवसà¥à¤¥à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° तà¥à¤µà¤°à¤¿à¤¤ गति से चलता रहता है। विकास की à¤à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ दूसरी अवसà¥à¤¥à¤¾ से à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होती है। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ के अपने कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ होते हैं। मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ों ने इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को पहचानने के लिठमानव विकास को विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं में बाटा है-
मानव विकास की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚
मानव विकास की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚
मानव विकास की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं को निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित à¤à¤¾à¤—ों में बांटा गया है-
1. गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾
2. शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ – जनà¥à¤® से 5/6 वरà¥à¤·
3. बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ – 6 से 12 वरà¥à¤·
4. किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ – 12 से 18 वरà¥à¤·
5. पà¥à¤°à¥Œà¤¢à¤¼à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ – 18 वरà¥à¤· से ऊपर
मानव विकास की अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं से संबंधित महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तथà¥à¤¯-
(A) जनà¥à¤® के समय बालक का à¤à¤¾à¤° 3.2 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® होता है।
(B) जनà¥à¤® के समय बालकों की लंबाई 51.5 सेंटीमीटर होती है।
(C) जनà¥à¤® के समय लड़कियों का à¤à¤¾à¤° 3 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® होता है।
(D) जनà¥à¤® के समय लड़कियों की लंबाई 50 सेंटीमीटर होती है।
(E) शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ को बालकों की आयॠकहते हैं।
(F) बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को लड़कियों की आयॠकहते हैं।
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ किसे कहते हैं?
जनà¥à¤® से 6 वरà¥à¤· की अवसà¥à¤¥à¤¾ शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ कहलाती है।
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚
फà¥à¤°à¤¾à¤¯à¤¡ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°,†बालक को à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में कà¥à¤¯à¤¾ बनना है इसका निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤£ इनà¥à¤¹à¥€ 4 या 5 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में हो जाता है।â€
सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚ग के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ,†जीवन के पà¥à¤°à¤¥à¤® 2 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में बालक अपने à¤à¤¾à¤µà¥€ जीवन का शिलानà¥à¤¯à¤¾à¤¸ करता है।â€
गेसल के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°,†बालक पà¥à¤°à¤¥à¤® 6 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ मेें बाद के 12 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से दोगà¥à¤¨à¤¾ सीख लेता है।â€
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ की विशेषताà¤à¤‚-
1. तीवà¥à¤° शारीरिक विकास
2. तीवà¥à¤° मानसिक विकास
3. सीखने में तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾
4. दोहराने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
5. जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
6. सà¥à¤µ पà¥à¤°à¥‡à¤® की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾
7. काम पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
तीवà¥à¤° शारीरिक विकास
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ में शारीरिक विकास तीवà¥à¤° गति से होता है। जनà¥à¤® के समय लड़कियों का à¤à¤¾à¤° लड़कों की अपेकà¥à¤·à¤¾ अधिक और लंबाई लड़कियों की अपेकà¥à¤·à¤¾ लड़कों की अधिक होती है। जनà¥à¤® के समय किसी शिशॠका à¤à¤¾à¤° 3 से 3.2 किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® होता है तथा लंबाई 50 से 51.5 सेंटीमीटर होती है। जनà¥à¤® के समय शिशॠमें हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की कà¥à¤² संखà¥à¤¯à¤¾ 270 होती है। शिशॠके मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की लंबाई, शरीर की लंबाई की लगà¤à¤— 1/4 होती है। जनà¥à¤® के समय मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• का à¤à¤¾à¤° 350 गà¥à¤°à¤¾à¤® होता है यह यह à¤à¤¾à¤° 2 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में दà¥à¤—ना à¤à¤µà¤‚ शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ के अंतिम समय तक 1260 गà¥à¤°à¤¾à¤® हो जाता है।
तीवà¥à¤° मानसिक विकास
मानसिक विकास से तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ मानसिक शकà¥à¤¤à¤¿ का उदय होना, पà¥à¤·à¥à¤Ÿ होना और धीरे-धीरे चरम सीमा तक पहà¥à¤‚चने के साथ-साथ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में उस योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ का विकास होना है जिसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वह वातावरण की परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से सामंजसà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤•ूलन बनाना सीखता है। यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ इतनी जटिल होती है कि इसकी पà¥à¤°à¤•ारà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का वरà¥à¤£à¤¨ करना असंà¤à¤µ हो जाता है।
सीखने में तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾
इस अवसà¥à¤¥à¤¾ का बालक मैं सीखने की तीवà¥à¤° लालसा होती है। बालक में हंसने ,मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ ,किसी वसà¥à¤¤à¥ को पकड़ने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करने ,वसà¥à¤¤à¥à¤“ं को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से देखने तथा तेज पà¥à¤°à¤•ाश में कà¥à¤°à¥‹à¤§ को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने जैसे गà¥à¤£ विकसित होने लगते हैं।
दोहराने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का बालक बड़ों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठकारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को दोहराने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है। बालक जिस पà¥à¤°à¤•ार अपने घर के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को देखता है वैसा ही अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करता है। बालक किसी खिलौने या वसà¥à¤¤à¥ को पकड़कर मà¥à¤‚ह में डालता है ,विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ को निकालता है और बिना सहारे के बैठने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करता है।
जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ के बालक बड़े जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥ होते हैं। बालक के संपरà¥à¤• में वसà¥à¤¤à¥à¤“ं या खिलौनों को लाने पर वह उन वसà¥à¤¤à¥à¤“ं को दांतों से काटकर खिलौने के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ अंगों को अलग करके अपनी जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ को संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ करता हैं।
सà¥à¤µ पà¥à¤°à¥‡à¤® की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ के बालक में सà¥à¤µ पà¥à¤°à¥‡à¤® की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ पाई जाती है। जिसे नारà¥à¤¸à¥€à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® कहा जाता है। अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक चाहते हैं कि उनके ममà¥à¤®à¥€ पापा ,à¤à¤¾à¤ˆ-बहन सिरà¥à¤« उसी को पà¥à¤°à¥‡à¤® करें किसी अनà¥à¤¯ बालक को नहीं।
काम पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ तथा अनà¥à¤¯ मनोविशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ वादियों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ में काम पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ अतà¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¬à¤² पाई जाती है परंतॠशिशॠवयसà¥à¤•ों के समान काम पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ ना करके मां के सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करके अथवा हाथ पैर के अंगूठे को चूस कर काम पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ को संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ करता है।
शैशवावसà¥à¤¥à¤¾ के बालक में ओडिपस à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ गà¥à¤°à¤‚थि के कारण उसका à¤à¥à¤•ाव अपनी मां की तरफ होता है जिसे मातृपà¥à¤°à¥‡à¤® कहा जाता है तथा लड़कियों का à¤à¥à¤•ाव इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ गà¥à¤°à¤‚थि के कारण अपने पिता की तरफ होता है जिसे पितृपà¥à¤°à¥‡à¤® कहते हैं।
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ किसे कहते हैं?
6 से 12 वरà¥à¤· की अवसà¥à¤¥à¤¾ को बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ कहते हैं। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को समठपाना बहà¥à¤¤ कठिन होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि विकास की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से यह अवसà¥à¤¥à¤¾ जटिल अवसà¥à¤¥à¤¾ होती है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के शारीरिक, मानसिक सामाजिक व नैतिक परिवरà¥à¤¤à¤¨ होते हैं इसलिठइस अवसà¥à¤¥à¤¾ को विकास का अनोखा काल कहा जाता है।
पूरà¥à¤µ बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ (6 से 9 वरà¥à¤·) को खिलौनों की आयॠकहते हैं, इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में बालक औपचारिक शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठकर देता है।
उतà¥à¤¤à¤° बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की अवधि 9 से 12 वरà¥à¤· होती है।
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को गंदी अवसà¥à¤¥à¤¾ तथा गिरोह की अवसà¥à¤¥à¤¾ के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है।
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की विशेषताà¤à¤‚
1. शारीरिक तथा मानसिक विकास में सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में शारीरिक तथा मानसिक विकास में सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ आने लगती है इसका कारण मांस पेशियों में दृढ़ता होती है। मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ आने लगती है
रॉस महोदय इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को मिथà¥à¤¯à¤¾ परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ कहते हैं।
2. मानसिक योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿
इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में बालक दो वसà¥à¤¤à¥à¤“ं में सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ अंतर कर सकता है वह लकड़ी और कोयला तथा शीशा और पतà¥à¤¥à¤° में अंतर बता सकता है छोटी-छोटी घटनाओं का वरà¥à¤£à¤¨ कर सकता है तथा साधारण समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के हल को खोज सकता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक को सिकà¥à¤•ों का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ हो जाता है वह दिन तारीख तथा सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ को बता सकता है किसी फिलà¥à¤® को देखकर उसका वरà¥à¤£à¤¨ कर सकता है।
3. जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ में पà¥à¤°à¤¬à¤²à¤¤à¤¾
इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक में जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ की पà¥à¤°à¤¬à¤²à¤¤à¤¾ पाई जाती है। अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ इस अवसà¥à¤¥à¤¾ का बालक विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ वसà¥à¤¤à¥à¤“ं के संबंध में कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ ,कब, कà¥à¤¯à¤¾ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¤µà¤¾à¤šà¤• शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से अपनी जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ शांत करता है।
3. समूह की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का बालक किसी न किसी टोली का सदसà¥à¤¯ बन जाता है वह अपने साथी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ खेलता है तथा अपने साथी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ जाता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक में संगà¥à¤°à¤¹ करने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ पाई जाती है अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ इस अवसà¥à¤¥à¤¾ का बालक, वसà¥à¤¤à¥à¤“ं को इकटà¥à¤ ा करना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठकर देता है।
4. सामाजिक तथा नैतिक गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का विकास
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का बालक किसी समाज का हिसà¥à¤¸à¤¾ बन जाता है समाज के हिसà¥à¤¸à¤¾ बनने से बालक में सामाजिक तथा नैतिक गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का विकास होता है। बालक अपने बड़ों का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करता है इससे बालक में शिषà¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° जैसे गà¥à¤£ विकसित होते हैं। बालक अनà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को समà¥à¤®à¤¾à¤¨ देने लगता है।
5. रचनातà¥à¤®à¤• कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में वृदà¥à¤§à¤¿
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का बालक रचनातà¥à¤®à¤• कारà¥à¤¯ करने लगता है जैसे चितà¥à¤° बनाना, कागज के खिलौने बनाना, जहाज बनाना ,लकड़ी के खिलौने बनाना। वही बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की लड़कियां संगीत, कला ,कताई -बà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ तथा घर के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में रूचि लेने लगती हैं।
6. बहिरà¥à¤®à¥à¤–ी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ का विकास
बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ का बालक सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के साथ-साथ बाहरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ महतà¥à¤µ देने लगता है। बालक अपने आस-पड़ोस के लोगों से मिलने, बोलने तथा खेलने में रà¥à¤šà¤¿ लेने लगता है।
किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ किसे कहते हैं?
किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ मानव विकास की अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ अवसà¥à¤¥à¤¾ है इस अवसà¥à¤¥à¤¾ की अवधि सामानà¥à¤¯à¤¤à¤¯à¤¾ 12 से 18 वरà¥à¤· मानी जाती है इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• तीन à¤à¤¾à¤—ों में विà¤à¤•à¥à¤¤ करते हैं
1. पà¥à¤°à¤¾à¤•ॠकिशोरावसà¥à¤¥à¤¾- 11 से 12 वरà¥à¤· या 12 से 14 वरà¥à¤·
2. पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• किशोरावसà¥à¤¥à¤¾- 14 से 17 वरà¥à¤·
3. उतà¥à¤¤à¤° किशोरावसà¥à¤¥à¤¾- 17 से 19 या 20 वरà¥à¤·
किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾à¤à¤‚
किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ की विशेषताà¤à¤‚
1. पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ में बालक का शारीरिक तथा मानसिक विकास तीवà¥à¤° गति से होता है।
2. यह अवसà¥à¤¥à¤¾ बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की समापà¥à¤¤à¤¿ तथा पà¥à¤°à¥Œà¤¢à¤¼à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बीच की अवसà¥à¤¥à¤¾ होती है इसलिठइस अवसà¥à¤¥à¤¾ को संधि काल की अवसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ कहते हैं।
3. इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में संवेगों में उथल-पà¥à¤¥à¤² तथा तनावों में रहने के कारण इस अवसà¥à¤¥à¤¾ को मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• समसà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ कहते हैं।
4. किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ में बालक तथा बालिकाà¤à¤‚ धीरे-धीरे परिपकà¥à¤µà¤¤à¤¾ की ओर बढ़ने लगते हैं तथा किशोरावसà¥à¤¥à¤¾ की समापà¥à¤¤à¤¿ के बाद किशोर पूरà¥à¤µ परिपकà¥à¤µ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ बन जाते हैं।
5. इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक कà¥à¤°à¥‹à¤§, घृणा, चिड़चिड़ापन आदि को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं रख पाते जिसके कारण किशोरों को वातावरण के साथ सामंजसà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने में कठिनाई होती है।
6. इस अवसà¥à¤¥à¤¾ का बालक कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ जगत में विचरण करता रहता है। इसी कारण वह दिवासà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ देखने लगता है। बालकों के कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ जगत में रहने की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ साहितà¥à¤¯ और गायन में पà¥à¤°à¤•ट होती है। बालिकाओं में कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ शकà¥à¤¤à¤¿ अधिक होती है।
7. इस अवसà¥à¤¥à¤¾ के बालक में वीर पूजा तथा वीर नायक की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का विकास होता है।
8. बालà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के बालकों में समाज सेवा की पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ पाई जाती है।
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